यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता: !!

भारत में अनेको प्रान्त हैं और हर प्रान्त में अलग अलग रीती रिवाज़ हैं | ऐसी ही एक अनोखी प्रथा है हमारे बुंदेलखंड की जिसे मैं आज सभी को बताना चाहता हूँ |
हमारे बुंदेलखंड में बेटियों और कन्यायों को सबसे पूजनिय माना जाता है | चाहे बेटी सबसे बड़ी हो या छोटी लेकिन उसके पैर घर का हर सदस्य छूता है, चाहे बड़ा भाई हो या पिता या दादा या दादी ही क्यों न हो लेकिन घर की बेटी पूरे कुटुंब के लिए पूजनिय होती है| यहाँ तक तो शायद सबको लगे की ऐसा बहुत से प्रान्तो में रिवाज़ है लेकिन बुंदेलखंड में बेटियां घर में ही नहीं बल्कि पूरे गाँव में पूजनिय होती हैं |
बेटी चाहे किसी भी सवर्ण जाती से हो या किसी पिछड़ी जाती से हो या समाज के किसी भी तबके से आती हो लेकिन वो सभी गाँव वासियों को एक समान पूजनिय है | सभी बड़े बूढ़े कन्याओं के चरण छूते हैं फिर चाहे वो किसी की भी बेटी हो |
शादी के बाद जब बेटी ससुराल में पहली बार आती है तो सास घर की दहलीज के बाहर उसको लक्ष्मी समान मान कर उसके पहले पैर छूती है और जब बहु घर में प्रवेश करती है तो अपनी सास को माँ मानकर पैर छूती है |

कन्याओं का सम्मान सर्वोपरि है और मुझे गर्व है की हमारे बुंदेलखंड में ये रीती रिवाज़ राजाओं के ज़माने से चले आ रहे हैं | ये रीती समाज को जाती और पंथ की दीवारों को दूर करने और सामाजिक समरसता को कायम रखने में सराहनीय है |

आज के समय में मुझे ये लगता है की ये प्रथा पूरे भारत में सभी को अपनानी चाहिए | अगर आपको ऐसा लगे तो ये सन्देश सभी तक पहुचाइये |

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